हर मां चाहती है कि जब वो अपने बच्चे को जन्म दे तो सबसे पहले अपने बच्चे का चेहरा देखा, लेकिन क्या हो अगर एक मां अपने बच्चे का चेहरा देखने से पहले ही दुनिया को अलविदा कह दे? कुछ ऐसा ही हुआ भाठा गांव की 23 वर्षीय वर्षा चौहान के साथ, जिसे प्रसव पीड़ा होने पर डॉक्टर के पास ले जाया गया. लेकिन किसी को क्या पता था कि जान बचाने वाला डॉक्टर ही उसके लिए यमराज बन कर आएगा. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.
क्या है पूरा मामला?
मामला गुजरात के खेड़ा जिले के भाठा गांव का है, जहां 9 अप्रैल, 2023 को हुई, जब गर्भवती वर्षा को प्रसव पीड़ा हुई. उसके पति भावेश चौहान और परिवार ने उसे पहले मातर के सरकारी अस्पताल ले गए. लेकिन वहां जब डॉक्टर नहीं मिले तो उसे पास के वासो गांव में स्थित एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया, जो कि डॉ. रमन भरवड़ का था. डॉ. भरवड़ ने परिजनों को बताया कि सी-सेक्शन करना आवश्यक है. परिवार ने डॉक्टर की बात मान ली और ऑपरेशन की सहमति दे दी. दोपहर करीब 2:30 बजे ऑपरेशन किया गया और एक स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ. लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं.
नहीं आया ऑपरेशन के बाद होश
वर्षा ऑपरेशन के बाद होश में नहीं आई. परिवार को शरीर से अत्यधिक रक्तस्राव होता दिखाई दिया, लेकिन इस दौरान डॉ. भरवड़ अस्पताल छोड़कर चले गए थे. वर्षा की हालत बिगड़ती गई, और अगले दिन दोपहर 1:30 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया. जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अहमदाबाद सिविल अस्पताल से आई, तो उसमें स्पष्ट रूप से लिखा था कि मौत का कारण ऑपरेशन के दौरान ज्यादा खून बहना है. इसके बाद वर्षा के पिता, भूपत वाघेला ने इस घटना को लेकर गहन पड़ताल शुरू की और जो जानकारी सामने आई, वह और भी चौंकाने वाली थी.
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